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डर

डर है ..... संभावित अनिष्ट की आशंका का, चिंतन की ज्वाला में जलने का, मोह के मकड़जाल में फंसने का, और रिश्तों के बिखरने का ।   डर है ..... भविष्य की रूपरेखाओं के मिटने का, लक्ष्य के मार्ग में न टिक पाने का,  अहंकार और लोभ के प्रवाह आने का, और अंततः इस दुनिया से जाने का ।                          - तरुण